भारत की आत्मा की आवाज थे अटल जी *भूपेन्द्र सवन्नी*

जांजगीर-चांपा // कार्यक्रम की शुरुआत अपने पितृपुरुषो के तैलचित्र पर दीप प्रज्वलित व माल्यार्पण कर अटल बिहारी वाजपेई जिन्दाबाद भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई अमर रहे अमर रहे के नारे के साथ हुई।
*वाणी में मर्यादा*, *संकल्प में अटल* – *अंबेश जांगड़े*
अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष अंबेश जांगड़े ने कहा कि अटल जी की वाणी मे मर्यादा और संकल्प मे अटल ।यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि अटल बिहारी वाजपेयी जी के संपूर्ण व्यक्तित्व का सार है। उनकी वाणी में सदैव शालीनता, संयम और गरिमा झलकती थी। वे विरोधियों से भी कटु शब्दों का प्रयोग नहीं करते थे। संसद हो या जनसभा, उनके शब्द न तो किसी को ठेस पहुँचाते थे और न ही मर्यादा की सीमा लांघते थे। असहमति में भी सम्मान बनाए रखना उनकी विशेषता थी।उनकी भाषा में ओज था, परंतु अहंकार नहीं; स्पष्टता थी, पर कठोरता नहीं। वे शब्दों से संवाद करते थे, संघर्ष नहीं। यही कारण था कि उनके विचार विरोधियों को भी सोचने पर विवश कर देते थे।जहाँ वाणी में विनम्रता थी, वहीं उनके संकल्प में अद्भुत दृढ़ता थी। राष्ट्रहित से जुड़े निर्णयों में वे कभी डगमगाए नहीं। पोखरण परमाणु परीक्षण हो या सुशासन की दिशा में लिए गए कठोर निर्णय—उनका संकल्प अडिग रहा। परिस्थितियाँ कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों, देश की गरिमा और आत्मसम्मान से उन्होंने कभी समझौता नहीं किया।अटल बिहारी वाजपेयी भारत की आत्मा थे* *भूपेन्द्र सवन्नी* क्रेडा अध्यक्ष व जांजगीर चाम्पा विधानसभा के प्रभारी वरिष्ठ भाजपा नेता जांजगीर भाजपा कार्यालय मे कार्यकर्ताओ को सम्बोधित करते हुए उक्त बाते अटल स्मृति सम्मेलन मे कार्यकर्ताओ को सम्बोधित करते हुए बोल रहे थे उन्होंने कहा कि अटल जी के विचारों में भारत की सभ्यता बोलती थी, उनके शब्दों में लोकतंत्र की मर्यादा झलकती थी और उनके कर्मों में राष्ट्रसेवा की निष्ठा दिखाई देती थी। वे ऐसे नेता थे जो सत्ता में रहते हुए भी विनम्र रहे, विरोध में भी शालीन और निर्णय में दृढ़ कवि हृदय, संवेदनशील सोच और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाला उनका व्यक्तित्व भारतीय संस्कृति के ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ भाव को साकार करता था। अटल जी ने राजनीति को टकराव नहीं, संवाद का माध्यम बनाया—इसलिए वे केवल प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि आम जनता के भारत की आत्मा की आवाज़ थे आज पुरा राष्ट्र अटल जी की जयंती उत्सव के रुप मे मना रहे है 1999 का कारगिल युद्ध मे हमारे देश के सेना के जवानों ने दुश्मनो को परास्त कर उनके नेतृत्व मे हमने प्राप्त किया इस देश मे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की बड़ी देन अटल बिहारी वाजपेई जी की ही थी इस देश मे सर्व शिक्षा अभियान को गति देने का काम अटल जी ने अपने प्रधानमंत्री कार्यकाल मे ही किया था संचार क्रांति को बढ़ावा देकर घर बैठे मोबाइल मे आज हम देश विदेश बात कर रहे है ये अटल जी की देन है छग राज्य का निर्माण अटल जी ने अपने कार्यकाल मे किया आज हमारा प्रदेश अग्रणी राज्य मे गिना जाता है उसकी देन अटल जी है उनके नाम से हमारे प्रदेश मे जनकल्याण की अनेको योजनाए चल रही है।
*सुशासन का अटल मॉडल* – *सवन्नी*
अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत में भारत का भविष्य
25 दिसंबर को मनाया जाने वाला सुशासन दिवस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि अटल बिहारी वाजपेयी की दूरदर्शी शासन सोच का प्रतीक है।भारत सरकार ने वर्ष 2014 में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती को पूरे देश में सुशासन दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इसका उद्देश्य नागरिकों में सरकार की जवाबदेही और प्रशासनिक पारदर्शिता के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। 25 दिसंबर को सरकार के लिए कार्य दिवस घोषित कर अटलजी के योगदान को स्मरण किया जाता है।
*अटल जी ने देश को सुशासन की सरकार देने का काम किया* *नारायण चंदेल*
पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने अटल स्मृति जांजगीर चाम्पा विधानसभा स्तरीय सम्मेलन मे कार्यकर्ताओ को सम्बोधित करते हुए कहा कि अटल जी इस देश के एकमात्र ऐसे अच्छे प्रशासक थे जिन्होंने इस देश को सुशासन की सरकार देने का काम किया गठबंधन की सरकार कैसे चलाई जाती है उन्होंने पुरे देश को बताया और सिखाया।अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार सुशासन का प्रतीक थी अटल बिहारी वाजपेयी जी का कार्यकाल भारतीय लोकतंत्र में सुशासन का स्वर्णिम अध्याय माना जाता है अटल जी के लिए सत्ता साधन नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम थी अटल जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए श्री चंदेल ने कहा कि अटल जी बहुत ही सामान्य परिवार से थे बचपन मे वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े बाद मे 1952 मे राजनीतिक संगठन बनाकर भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य बने देश की स्वतंत्रता के लिए विभिन्न आन्दोलन मे हिस्सा लिया जेल गए पत्रकारिता की चुनाव लड़े जीते हारे 9 बार लोकसभा सांसद 2 बार राज्यसभा सांसद रहे मोरारजी देसाई की सरकार में सन् १९७७ से १९७९ तक विदेश मन्त्री रहे और विदेशों में भारत की छवि बनायी। १९८० में जनता पार्टी से असन्तुष्ट होकर इन्होंने जनता पार्टी छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी की स्थापना ६ अप्रैल १९८० को करी जिसके अध्यक्ष पद का दायित्व भी वाजपेयी को सौंपा गया उनका एकबार जब छग आगमन हुआ था तब चुनाव के दौरान 1999 मे उन्होंने कहा कि आप छग से पुरे ग्यारह सीट जीताकर दो तो हम छग राज्य का गठन कर देंगे हम ग्यारह तो नही जीत पाए लेकिन उन्होंने संसद मे बिल पास करके हम छत्तीसगढ़ीयो के लिए अपना अलग राज्य बना दिया उनका प्रधानमंत्री के रूप मे तीन कार्यालय रहा जिसमे उन्होंने देश मे जनहित मे अनेक जन-कल्याणकारी योजनाए लागू की जिसका लाभ आज तक इस देश के नागरिको को मिल रहा है उक्त सम्मेलन मे व्यवसायिक प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक कार्तिकेशवर स्वर्णकार नगरपालिका अध्यक्ष प्रदीप नामदेव रेखा गढ़वाल अमर सुल्तानिया जिला महामंत्री नंदनी रजवाड़े जिला उपाध्यक्ष पंकज अग्रवाल आशुतोष गोस्वामी लक्ष्मी देवांगन जिला प्रवक्ता विकास शर्मा कोषाध्यक्ष पुष्पेंद्र प्रताप सिंह जिला मंत्री संतोषी दुबे प्रदीप शराफ अनिल शर्मा कमल देवांगन अमरनाथ सोनी सनत पांडेय मोहन यादव रवि पांडेय राकेश रुपवानी मंडल अध्यक्ष हितेश यादव संतोष थवाईत ध्वजाराम साहु समर्थ सिंह प्रियंका सिंह उमा सोनी डा धनेशवरी जाग्रति प्रेमशंकर थवाईत संजीता माली दुलौरिन चौरसिया भूपेन्द्र साहु प्रदीप सोनी रितेश अग्रवाल अनुराग तिवारी साकेत तिवारी निरंजन कोसले अजय राठौर पूजा राठौर गोलू दुबे प्रदीप राठौर सोनु यादव हरि सोनवानी पिंकल माली रिया यादव दिव्यांश चंदेल महावीर सोनी रामलला सोनी छवि कश्यप सहित कार्यकर्ता उपस्थित थे।





