शिक्षक समाज की रीढ़ होते हैं:डां उमेश दुबे

जांजगीर-चांपा
बिर्रा // शिक्षक दिवस हर साल 5 सितंबर को भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। यह दिन हमारे जीवन को सही दिशा देने वाले गुरुओं के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने का एक विशेष अवसर है।
शिक्षक दिवस का महत्व और इतिहास
* डॉ. राधाकृष्णन का योगदान: जब डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के राष्ट्रपति बने, तो उनके छात्रों ने उनका जन्मदिन मनाने की इच्छा जताई। उन्होंने सुझाव दिया कि उनके जन्मदिन को व्यक्तिगत उत्सव के रूप में मनाने के बजाय शिक्षकों के योगदान को याद करने के लिए ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाया जाए।
* गुरु-शिष्य परंपरा: भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊपर माना गया है। शिक्षक केवल किताबों का ज्ञान नहीं देते, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्य, अनुशासन और सही-गलत की पहचान विकसित करते हैं।
राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका
* भविष्य के नागरिकों का निर्माण: शिक्षक देश के भावी डॉक्टरों, इंजीनियरों, वैज्ञानिकों, और नेताओं की नींव तैयार करते हैं।
* मार्गदर्शन और प्रेरणा: एक अच्छा शिक्षक छात्र की छिपी हुई प्रतिभा को पहचानकर उसे सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
शिक्षक समाज की रीढ़ होते हैं। उनके निस्वार्थ परिश्रम और मार्गदर्शन के बिना एक समृद्ध समाज की कल्पना नहीं की जा सकती। इसलिए शिक्षक दिवस पर हमें अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए।




