बम्हनीडीह व अकलतरा ब्लॉक के शिक्षकों के याचिका पर हाई कोर्ट ने दिया निर्णय

“पूर्व सेवा को अप्रासंगिक नही माना जा सकता”- हाई कोर्ट
पुरानी सेवा के आधार पर संविलियन हुआ तो उस सेवा को पेंशन हेतु मान्य क्यो नही
एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री और मंत्रियों को सौंपा है ज्ञापन
शासन पर नही पड़ेगा आर्थिक बोझ
जांजगीर-चांपा
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने प्रदेश के हजारों एल.बी. संवर्ग के शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मुहिम छेड़ी है। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा के नेतृत्व में शासन को सौंपे गए ज्ञापन में माननीय उच्च न्यायालय, बिलासपुर के हालिया ऐतिहासिक फैसलों का हवाला देते हुए, संविलियन से पूर्व की सेवा अवधि को जोड़कर ‘पूर्ण पेंशन’ निर्धारित करने हेतु नीति बनाने की मांग की गई है।
*न्यायालय के फैसलों को बनाया आधार*
एसोसिएशन ने माननीय उच्च न्यायालय द्वारा रामलाल डडसेना WPS 2930/2021, रमेश चंद्रवंशी, ऋषिदेव सिंह व अन्य याचिकाओं पर दिए गए निर्णयों का उल्लेख किया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि पेंशन कोई ‘खैरात’ नहीं बल्कि एक कल्याणकारी उपाय और स्थगित वेतन है। संविलियन तिथि (01.07.2018) से पूर्व शिक्षकों द्वारा दी गई दशकों की सेवा को शून्य नहीं माना जा सकता।छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन प्रदेश के उन हजारों शिक्षकों की ओर शासन का ध्यान आकृष्ट किया है जिन्होंने शिक्षाकर्मी/पंचायत संवर्ग के रूप में दशकों तक अपनी सेवाएं देकर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया है।माननीय उच्च न्यायालय, बिलासपुर में जांजगीर जिले के बम्हनीडीह ब्लॉक एवं अकलतरा ब्लॉक के शिक्षक रामलाल डडसेना, विनोद कुमार चौबे, माखन लाल राठौर, रामकृपाल डड़सेना, गोपाल प्रसाद जायसवाल, विकेश केशरवानी,शिव कुमार पटेल, उत्तम साहू, भीम सिंह राठौर,रमेश कुमार बरेठ, बाबूलाल कश्यप, डिलेश्वर प्रसाद डड़सेना, महेश राम खैरवार,सनत कुमार सिदार, कौशल प्रसाद साहू, पीताम्बर साहू, उमेश कुमार दुबे,फिरत राम कंवर,अंतु राम उरांव, प्रताप सिंह कंवर, रवि शंकर कुम्हार, शशि किरण चौबे, कल्पना चौहान, अर्चना डडसेना, ताराचंद पांडेय, ब्रजेश नायक, श्रीमती सेवती पटेल, दिनेश कुमार पटेल, श्रीमती शशिकला सरल, श्रीमती गीता नायक, संतोष कुमार देवांगन, गिरवर कुमार सांडिल्य, संतोष कुमार राजक ने WPS 2930/2021 याचिका दायर किया था, जिस पर दिनांक 23/01/2026 को सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायालय द्वारा ऐतिहासिक निर्णय पारित किया गया है। इस निर्णय के आलोक में टीचर्स एसोसिएशन ने मांग और तर्क शासन के समक्ष रखा है।माननीय उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि पेंशन कोई खैरात नहीं, बल्कि एक कल्याणकारी उपाय और स्थगित वेतन है। याचिकाकर्ताओं द्वारा संविलियन 01.07.2018 से पूर्व दी गई लंबी सेवा को अप्रासंगिक मानकर शून्य नहीं किया जा सकता।माननीय न्यायालय ने निर्देश दिया है कि शासन सेवा की निरंतरता, कार्य की प्रकृति, प्रशासनिक नियंत्रण और संवैधानिक सिद्धांतों (भेदभाव-निषेध और समानुपातिकता) को ध्यान में रखते हुए 120 दिनों के भीतर एक सचेत और कारणयुक्त आदेश (Speaking Order) जारी करे।
*न्यायसंगतता और प्रशासनिक तर्कसंगतता:*
माननीय न्यायालय के अनुसार, यदि केवल संविलियन तिथि से 10 वर्ष की गणना की जाती है, तो शिक्षक वर्ष 2028 के बाद ही पात्र हो पाएंगे, जबकि वे पहले ही राज्य के नियंत्रण में एक दशक से अधिक सेवा दे चुके हैं। यह न्यायसंगतता, अनुपातिकता और प्रशासनिक तर्कसंगतता के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
*प्रमुख मांगें और तर्क*
प्रथम नियुक्ति से गणना: शिक्षकों की प्रथम नियुक्ति तिथि (शिक्षाकर्मी/पंचायत संवर्ग) से ही सेवा की निरंतरता की गणना की जाए, ताकि 10 वर्ष की ‘अर्हक सेवा’ की तकनीकी बाधा दूर हो सके।संवैधानिक न्याय: केवल 2018 के बाद की सेवा गिनना न्यायसंगतता और प्रशासनिक तर्कसंगतता के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
*शासन पर नहीं पड़ेगा बड़ा आर्थिक बोझ*
प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा एवं प्रदेश उपाध्यक्ष बसंत चतुर्वेदी ने सांख्यिकीय आंकड़ों के साथ स्पष्ट किया कि प्रदेश के लगभग 1.40 लाख एल.बी. संवर्ग के शिक्षकों की सेवानिवृत्ति एक क्रमिक प्रक्रिया है।”प्रतिवर्ष औसतन केवल दो हजार से तीन हजार शिक्षक ही सेवानिवृत्त होंगे। इस क्रमिक प्रवाह के कारण राज्य शासन पर एकमुश्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। सेवानिवृत्ति चरणों में होने से इसका आर्थिक प्रभाव भी किस्तों में होगा, जिससे बजट प्रबंधन में सुगमता बनी रहेगी।”
*एल.बी. संवर्ग के शिक्षकों की सेवानिवृत्ति एवं क्रमिक वित्तीय प्रबंधन-*
शासन पर कोई आकस्मिक आर्थिक बोझ नहीं आएगा, यह क्रमिक प्रक्रिया राजकोषीय स्थिरता बनाए रखने में सहायक होगी।जब सेवानिवृत्ति चरणों में होगी, तो उसका आर्थिक प्रभाव भी किस्तों में होगा। अतः शासन के लिए एल.बी. संवर्ग की मांगों का वित्तीय प्रबंधन पूर्णतः व्यावहारिक और संभव है।छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा,प्रदेश उपाध्यक्ष बसंत चतुर्वेदी, जिलाध्यक्ष सत्येंद्र सिंह, जिला सचिव बोधी राम साहू, बम्हनीडीह ब्लॉक अध्यक्ष उमेश तेम्बुलकर, अकलतरा ब्लॉक अध्यक्ष विनोद चौबे ने मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री, शिक्षा मंत्री और संबंधित विभागों के सचिवों से आग्रह किया है कि जिस प्रकार सरकार ने पूर्व में सातवें वेतनमान और संविलियन का ऐतिहासिक निर्णय लिया, उसी संवेदनशीलता के साथ सभी शिक्षकों को पेंशन देने के लिए जनरल आर्डर जारी करें।छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने विश्वास जताया है कि शासन शिक्षकों के हितों और न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए शीघ्र ही सभी शिक्षकों के लिए सकारात्मक निर्णय लेगा, एसोसिएशन ने सभी शिक्षकों के हक में पेंशन का लाभ देने जनरल आर्डर करने की मांग सरकार व शासन से की है।



