जांजगीर चाम्पा

प्राथमिक विद्यालयों में प्रोजेक्ट मापन मेला का असर — गतिविधि आधारित शिक्षण को मिला विस्तार

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जांजगीर-चांपा // बम्हनीडीह विकासखंड के प्राथमिक विद्यालयों में 21 फरवरी को मापन संबंधी गतिविधियों का प्रस्तुतीकरण किया गया। 12 फरवरी को बीआरसी भवन में आयोजित उन्मुखीकरण बैठक के बाद पिछले तीन महीनों से कक्षाओं में चल रहे अभ्यास का यह सार्वजनिक प्रदर्शन रहा। यह केवल एक दिवसीय कार्यक्रम न होकर बच्चों द्वारा सीखी गई अवधारणाओं को साझा करने का अवसर बना।विकासखंड के 100 से अधिक विद्यालयों में बच्चों ने लंबाई, वजन, धारिता, समय-कैलेंडर, आकृतियाँ, परिमाप-क्षेत्रफल तथा मुद्रा-बिल निर्माण जैसी अवधारणाओं को गतिविधियों के माध्यम से प्रस्तुत किया। बीईओ, सीएसी एवं सीआरसी ने विद्यालयों का भ्रमण कर गतिविधियों का अवलोकन किया और बच्चों का उत्साहवर्धन किया, वहीं प्रधानपाठकों ने विद्यालय स्तर पर सफल नेतृत्व प्रदान करते हुए गतिविधियों के सुचारु संचालन को सुनिश्चित किया।गतिविधियों के दौरान बच्चों ने पहले वस्तुओं का अनुमान लगाया, फिर मानक इकाइयों से वास्तविक मापन कर तुलना की। तराजू-बाट से तौलना, स्केल-मीटर से नापना, घड़ी पढ़ना, कैलेंडर पहचानना तथा नकली नोटों से खरीद-बिक्री कर बिल बनाना प्रमुख अभ्यास रहे। गतिविधियाँ अलग-अलग स्टॉल तक सीमित न रहकर कक्षा में सीखे ज्ञान की निरंतरता के रूप में प्रस्तुत की गईं।शिक्षकों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विकसित नई पाठ्यपुस्तकों के दिशा-निर्देशों को केंद्र में रखते हुए शिक्षण किया। पाठ्यपुस्तक गतिविधियों, कार्यपुस्तिका अभ्यास और स्थानीय उदाहरणों को जोड़कर बच्चों को “करके सीखने” का अवसर दिया गया, जिससे गणित दैनिक जीवन से जुड़ सका।कार्यक्रम में समुदाय की भागीदारी भी रही। घरेलू वस्तुएँ, बर्तन, अनाज तथा पारंपरिक माप-तौल की जानकारी को सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में शामिल किया गया और कई स्थानों पर अभिभावक भी बच्चों के साथ जुड़े।अवलोकन में पाया गया कि नियमित अभ्यास वाले विद्यालयों में बच्चों ने आत्मविश्वास के साथ गतिविधियाँ संचालित कीं तथा आगंतुकों को स्वयं समझाया। बीआरसी द्वारा संदेशों एवं प्रेरक वीडियो के माध्यम से लगातार मार्गदर्शन और सतत निगरानी की गई, वहीं सीएसी-सीआरसी के नियमित सहयोग से गतिविधियों का प्रभावी संचालन हुआ।इस पहल के अंतर्गत “मापन मित्र विद्यालय” की अवधारणा भी विकसित की जा रही है, जिसमें बच्चे विद्यालय परिसर की वस्तुओं, कक्षाओं, बर्तनों तथा व्यक्तियों की ऊँचाई-वजन आदि का मापन अंकित कर आगंतुकों को विद्यालय का गणितीय परिचय देंगे। आगामी शैक्षणिक सत्र से इसे नियमित कक्षा-प्रक्रिया के रूप में सभी विद्यालयों में लागू करने की योजना है।इस प्रक्रिया से बच्चों में गणित का भय कम होने, आत्मविश्वास बढ़ने तथा दैनिक जीवन में गणित के उपयोग की समझ विकसित होने की उम्मीद व्यक्त की गई।

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