गुरु ही शिष्य को ज्ञानवान, चरित्रवान व सामर्थवान बनाता है….डां. रामरतन श्रीवास

जांजगीर-चांपा // गुरु शिष्य परम्परा भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न अंग है।एक गुरु ही शिष्य के जीवन में ज्ञान रूपी अमृत का सिंचन कर उसे ज्ञानवान, चरित्रवान व सामर्थवान बनाता है। राष्ट्र निर्माण में योगदान अतुलनीय है। यह उक्ति डॉ. राम रतन श्रीवास ‘राधे राधे’ (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष – जीवनधारा नमामि गंगे जल संसाधन नदी विकास गंगा संरक्षण मंत्रालय भारत सरकार एवं राष्ट्रीय महामंत्री – काव्य रसिक संस्थान) ने कहा। गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति की एक प्राचीन और पवित्र धारा है, जो ज्ञान को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक अखंड रूप से पहुँचाती है। यह केवल किताबी शिक्षा नहीं, बल्कि गुरु द्वारा शिष्य के मानसिक, नैतिक और आध्यात्मिक विकास का मार्गदर्शक है, जो समर्पण, श्रद्धा और विश्वास पर आधारित होकर चरित्र निर्माण और सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखता है। यह उपरोक्त उद्गार इंजीनियर विनय सिंह क्षत्रिय ने कहा। गुरू वह व्यक्ति होता है जो ज्ञान और अनुभव की ज्योति को शिष्य के जीवन में प्रकाशित करता है, जबकि शिष्य वह व्यक्ति होता है जो गुरु के उपदेशों और मार्गदर्शन में ज्ञान और श्रद्धा के साथ सीखने का प्रयास करता है यह उक्ति इंजीनियर रमेश साव ने कहा। कृष्ण कुमार साहू ने कहा कि शिष्य का कार्य गुरु के उपदेशों को अपनाना और उन्हें अपने जीवन में अमल में लाना होता है। कवयित्री लतेलिन ‘लता’ प्रधान ने अपने विचार रखते हुए बोली कि गुरु और शिष्य का संबंध एक अनोखा रिश्ता है जो ज्ञान, समृद्धि और साधना की ओर बढ़ता है। ऊषा यादव ने मन की बात कही है कि गुरु का रिश्ता केवल एक व्यक्ति के जीवन को प्रेरित नहीं करता है, बल्कि समाज को भी मजबूत और सशक्त बनाता है। सियाबाई ने गुरू की महिमा अनंत है जिसे वेद, पुराण ग्रंथ इत्यादि में वर्णित करने का प्रयास किया गया है लेकिन पूरी तरह से गुणगान करने में असमर्थ रहा। तो हम साधारण व्यक्ति व्याख्या नहीं कर सकते हैं। उक्त सभी कथन वर्ष 1988 में पूर्व माध्यमिक विद्यालय पिसौद जांजगीर-चांपा के छात्रों ने गुरू राधे श्याम कवंर गुरूजी के सेवा निवृत्त के अवसर पर कहा।गुरु राधे श्याम कंवर ने अपने पढ़ाए हुए छात्र/छात्राओं को देखकर भाव विभोर होकर भावुक हो गए।उन्होंने सभी के जीवन में मंगल कामना प्रेषित किया और ईश्वर से प्रार्थना किया कि इनके सभी समस्या को मेरे पास छोड़ दें , दुनिया की सारी खुशियां साथ लेकर जाएं साथ ही साथ निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर होते रहे। आज मैं अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूंँ कि मेरे शिष्य कोई इंजिनियर है. कोई डॉक्टर है, कोई केंद्रीय कर्मचारी , कोई राज्य कर्मचारी, कोई निजी क्षेत्र में , तो कोई सार्वजनिक क्षेत्र में, कोई धार्मिक क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कोई गृहणी बनकर भी राष्ट्र निर्माण में शामिल हैं ।मेरी शुभकामनाएं सदैव आप सभी के साथ है । कंवर गुरूजी ने अपने पढ़ाए हुए छात्र डॉ. राम रतन श्रीवास ‘राधे राधे’ को पशुपतिनाथ भारत-नेपाल अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव का ब्रांड एम्बेसडर बनने पर बधाई प्रेषित किया। सभी छात्रों ने मिलकर गुरु वंदना के साथ आरती भी उतारी और कवयित्री लतेलिन ‘लता’ प्रधान, डॉ. राम रतन श्रीवास ‘राधे राधे’ ने अपनी कविताओं से सभी का मन मोह लिया।कंवर गुरुजी ने शायराना अंदाज़ में अपनी कविताओं का वाचन किया वहीं कलम की मुस्कान ‘लता’ की पुस्तक का विमोचन किया गया। कंवर गुरुजी को स्मृति चिन्ह, अंग वस्त्र मेडल देकर सम्मानित किया गया। वहीं कंवर गुरुजी के कर कमलों से सभी छात्र छात्राओं को मेडल देकर सम्मानित किया गया।




