सक्ती-

छत्तीसगढ़ राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री स्व अजीत जोगी की 80 वीं जन्म जयंती में शामिल हुए अर्जुन राठौर

शक्ति // छत्तीसगढ़ राज्य की एक ही मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे के संस्थापक एवं राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत प्रमोद कुमार जोगी के 80 वीं जन्म जयंती उनके समाधि स्थल गौरेला में मनाया गया जिसमें छत्तीसगढ़ के समस्त जिले के कार्यकर्ता पदाधिकारी उपस्थित रहे गौरेलापेंड्रा मरवाही के पूर्व पूर्व विधायक डॉ के के ध्रुव एवं जनपद पंचायत अध्यक्ष जिला पंचायत अध्यक्ष सरपंच एवं जोगी परिवार के शुभचिंतक उपस्थित रहे प्रार्थना सभा में उपस्थित सम्मानिय जन सभी ने अपने-अपने विचार और श्रद्धा सुमन अर्पित किया इस कार्यक्रम में शक्ति जिले के जिला अध्यक्ष अर्जुन राठौर ने अपने विचार रखते हुए कहा कि अजीत जोगी एक नाम नहीं है यह एक विचारधारा है जोगी जी अपने जीवन काल में  IPS,IAS गोल्ड मेडलिस्ट इंजीनियर प्रोफेसर अधिवक्ता प्रवक्ता राज्य सभा एवं राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री रहे स्व जोगी जी  छत्तीसगढ़ के लिए दूसरे बाबा साहब के रूप में अवतरित हुए थे राठौर ने कहा कि स्व अजीत जोगी हमारे शक्ति जिले के लिए स्वयं भागीरथ के रूप में जन्म लिये थे हमारे क्षेत्र में गंगा रूपी नहर को लाकर किसानों को नवजीवन प्रदान दिए अपने मुख्यमंत्री के कार्यकाल में उन्होंने कम समय में छत्तीसगढ़ के अमीर धरती के गरीब लोगों के लिए बहुत सारी योजनाएं शुरुआत की थी जिसको आज तक ना बीजेपी ना कांग्रेस धरातल में न ला पाई है यह दिन उस महामानव को याद करने का है, जिन्होंने केवल एक प्रदेश नहीं बनाया, बल्कि एक बिखरे हुए अंचल को ‘छत्तीसगढ़ के अस्मिता’ और ‘आत्मसम्मान’ को एक माला में पिरोया 1 नवंबर 2000 को जब छत्तीसगढ़ का उदय हुआ, तब चुनौती थी एक नए शासन तंत्र को खड़ा करने की। प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में जोगी जी ने प्रदेश की प्रशासनिक नींव रखी। सिंचाई योजनाएं हों, सड़कों का जाल हो या शिक्षा का प्रसार—आज हम जिस विकसित छत्तीसगढ़ को देख रहे हैं, उसका ‘ब्लूप्रिंट’ उन्होंने ही तैयार किया था।साल 2004 के उस भीषण हादसे ने उन्हें शारीरिक रूप से व्हीलचेयर तक सीमित कर दिया, लेकिन उनके हौसले को नहीं तोड़ पाया।व्हीलचेयर पर बैठे-बैठे ही उन्होंने पूरे प्रदेश का दौरा किया, सभाएं कीं और जनता के हक की लड़ाई लड़ी। उनकी वो गर्जना—”सपना छोटा नहीं होना चाहिए”—आज भी हर युवा के कानों में गूँजती है।वे केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि एक प्रखर लेखक और अद्भुत वक्ता भी थे जोगी जी, भले ही आज आप हमारे बीच भौतिक रूप से नहीं हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ की हवाओं में, यहाँ के खेतों में और यहाँ के लोगों के अधिकारों की लड़ाई में आपका नाम हमेशा ‘अमर’ रहेगा। आप जैसा जननायक सदियों में एक बार आता है
” भूतो न भविष्यते,”
दूसरे शब्दों में यह भी कहा जाता हैं की स्वर्गीयअजीत जोगी जी “सपनों के सौदागर थे” प्रार्थना सभा में विशेष रूप से समसुल आलम, नवीन अग्रवाल, निलेश चौहान, प्रशांत त्रिपाठी, सौरभ झा,गौरव सिंह, सुशील निर्मलकर, शत्रुघ्न दास, रमेश कर्ष, सूरज खूंटे, अंकित मिश्रा,समीर, राज बहादुर, एवं देश केअलग-अलग जगह से जोगी परिवार के शुभचिंतक हजारों की संख्या में उपस्थित रहे।

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button