जांजगीर चाम्पा

शिक्षक सदन बम्हनीडीह में पेंशन याचिकाकर्ताओं ने की बैठक

याचिकाकर्ताओं ने टीचर्स एसोसिएशन द्वारा लगाए गए कैविएट का किया स्वागत
विगत 6 वर्ष पूर्व लगाए गए याचिका पर हुए निर्णय से प्रसन्नता की लहर
जांजगीर-चांपा
माननीय उच्च न्यायालय, बिलासपुर में बम्हनीडीह ब्लॉक से पेंशन याचिका लगाने वाले रामलाल डडसेना, गोपाल प्रसाद जायसवाल, उत्तम साहू, उमेश कुमार दुबे, रवि शंकर कुम्हार, शशि किरण चौबे, अर्चना डडसेना, ताराचंद पांडेय, भीम सिंह राठौर, रमेश कुमार बरेठ, महेश राम खैरवार,सनत कुमार सिदार, पीताम्बर साहू, फिरत राम कंवर, अंतु राम उरांव, प्रताप सिंह कंवर ने बैठक में शामिल होकर शासन को देने वाले अभ्यावेदन में हस्ताक्षर करके शासन के समक्ष जमा कर नीति निर्धारण हेतु आग्रह करने का निर्णय लिया गया।टीचर्स एसोसिएशन के प्रांताध्यक्ष संजय शर्मा के पहल पर कोंडागांव जिलाध्यक्ष ऋषिदेव सिंह द्वारा लगाए गए कैविएट का स्वागत किया गया।बैठक में उपस्थित बम्हनीडीह ब्लॉक के पदाधिकारी बसंत चतुर्वेदी, उमेश तेम्बुलकर, जगेंद्र वस्त्रकार, नवधा चंद्रा, वीरेंद्र दुबे, सुन्दर सिंह कंवर ने याचिकर्ताओं को बधाई देते हुए पेंशन निर्णय पक्ष में आने पर हर्ष व्यक्त किया।ज्ञात हो कि अधिवक्ता अनूप मजूमदार के माध्यम से WPS 2930/2021 याचिका दायर करके पूर्व सेवा अवधि को पेंशन की गणना में शामिल करने करने की मांग रखा था।माननीय उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया है कि पेंशन कोई ‘खैरात’ नहीं बल्कि एक कल्याणकारी उपाय है, संविलियन तिथि (01.07.2018) से पूर्व शिक्षकों द्वारा दी गई दशकों की सेवा को शून्य नहीं माना जा सकता।माननीय न्यायालय ने निर्देश दिया है कि शासन सेवा की निरंतरता, कार्य की प्रकृति, प्रशासनिक नियंत्रण और संवैधानिक सिद्धांतों के अनुसार शासन नीति बनावे।

“”शासन पर नहीं पड़ेगा बड़ा आर्थिक बोझ””

शासन पर कोई आकस्मिक आर्थिक बोझ नहीं आएगा, यह क्रमिक प्रक्रिया राजकोषीय स्थिरता बनाए रखने में सहायक होगी।जब सेवानिवृत्ति चरणों में होगी, तो उसका आर्थिक प्रभाव भी किस्तों में होगा। अतः शासन के लिए एल.बी. संवर्ग की मांगों का वित्तीय प्रबंधन पूर्णतः व्यावहारिक और संभव है।

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