जांजगीर चाम्पा

जांजगीर-चांपा में महिला आरक्षण पर सियासत तेज, राजेश अग्रवाल और विधायक व्यास कश्यप ने बीजेपी को घेरा

जांजगीर-चांपा // महिला आरक्षण के मुद्दे पर जारी सियासी घमासान अब जांजगीर-चांपा जिले में भी खुलकर सामने आ गया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस समिति की विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति के बाद जिला कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है।जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने कहा कि भाजपा महिला आरक्षण को लेकर लगातार भ्रम फैला रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शुरू से ही महिला आरक्षण की प्रबल समर्थक रही है और आज भी इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख रखती है।वहीं जांजगीर-चांपा विधायक व्यास कश्यप ने आरोप लगाया कि भाजपा की मंशा महिला आरक्षण लागू करने की नहीं, बल्कि परिसीमन के जरिए राजनीतिक लाभ लेने की थी।

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🔎 क्या है पूरा मामला

कांग्रेस के अनुसार नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 पहले ही संसद से पारित होकर कानून बन चुका है। इसके बावजूद 16 अप्रैल 2026 को संसद में जो विधेयक प्रस्तुत किया गया, वह महिला आरक्षण से जुड़ा नहीं बल्कि परिसीमन (सीटों के पुनर्निर्धारण) से संबंधित था।इस प्रस्ताव में लोकसभा सीटों को 850 तक बढ़ाने, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने तथा केंद्र शासित प्रदेशों के कानूनों में संशोधन की बात कही गई थी।

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❗ क्यों गिरा विधेयक – कांग्रेस का दावा

कांग्रेस ने अपनी विज्ञप्ति में दावा किया है कि यह विधेयक इसलिए गिरा क्योंकि:

भाजपा 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करना चाहती थी

जबकि 2026-27 में नई जनगणना प्रस्तावित है
महिला आरक्षण को तुरंत लागू करने के बजाय इसे परिसीमन से जोड़ा जा रहा था
बिना परिसीमन के वर्तमान सीटों पर 33% आरक्षण लागू किया जा सकता था
🔥 स्थानीय स्तर पर बढ़ी हलचल
इस मुद्दे पर जिले में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा महिला आरक्षण के नाम पर देशभर में भ्रम फैला रही है, जबकि उसका असली उद्देश्य सीटों का राजनीतिक समीकरण बदलना है।
🗣️ कांग्रेस ने गिनाए अपने पुराने कदम
कांग्रेस ने यह भी कहा कि पंचायत और नगरीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण दिलाने का श्रेय कांग्रेस सरकारों को जाता है। आज देशभर में लाखों महिला जनप्रतिनिधि कांग्रेस की नीतियों का परिणाम हैं।
🧭 आगे की राजनीति
जांजगीर-चांपा में यह मुद्दा आने वाले समय में और गर्माने की संभावना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि महिला आरक्षण का मुद्दा स्थानीय चुनावों में भी बड़ा असर डाल सकता है।

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