जांजगीर चाम्पा

एजुकेशन कॉन्क्लेव में शिक्षकों ने प्रस्तुत किए उत्कृष्ट नवाचार

एफएलएन लक्ष्य पर फोकस, 2027 तक हर बच्चे को बुनियादी दक्षता दिलाने का संकल्प’ – डीएमसी हरीराम जायसवाल



जांजगीर-चांपा// शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रचनात्मकता, नवाचार और समर्पण का जीवंत उदाहरण भी है। इसी सोच को साकार करते हुए आयोजित एजुकेशन कॉन्क्लेव में शिक्षकों ने अपने उत्कृष्ट कार्यों और नवाचारों की प्रभावशाली प्रस्तुति दी, जिसने सभी प्रतिभागियों को प्रेरित किया।समग्र शिक्षा विभाग, जांजगीर-चांपा एवं अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के संयुक्त तत्त्वधान में जांजगीर-चांपा  जिले में आयोजित एजुकेशन कॉन्क्लेव में प्रत्येक ब्लॉक से आए  बीआरसीसी, बीईओ, सीएसी एवं शिक्षकों ने अपने-अपने ब्लॉक में किए गए अभिनव प्रयासों को साझा किया। अकलतरा ब्लॉक से बीआरसीसी शैलेन्द्र बैस, बलोदा से शामिल बीआरसीसी अर्जुन सिंह क्षत्री, बम्हनीडीह से बीईओ रतना थवईत, बीआरसीसी एच. के. बेहार, नवागढ़ से बीईओ अशोक पाटले, एबिओ तरुण साहू उपस्थिति और मार्गदर्शन में कार्यक्रम को संचालित किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत गैलरी वॉक से हुई, जहाँ शिक्षकों ने अपने शैक्षणिक मॉडल, टीएलएम (Teaching Learning Material), और बच्चों के समग्र विकास से जुड़े प्रयोगों को प्रदर्शित किया। नमिता गोपाल ने  कॉन्क्लेव प्रस्थापना को रखते हुए इसके उद्देश्यों के बारे में बताया कि कैसे हमने 2025- 26 में कुछ उत्कृष्ट कार्य किए हैं। प्रत्येक ब्लॉक अपने उत्कृष्ट कार्य से एक दूसरे से अवगत कराएंगे।डीएमसी हरीराम जायसवाल ने अपने वक्तव्य में नई शिक्षा नीति के अनुरूप कार्य करते हुए एफएलएन (बुनियादी साक्षारता एवं संख्या ज्ञान) को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमारे जिले में 223 बालवाड़ियों में नियमित शैक्षिक गतिविधियों के संचालन से एफएलएन को और अधिक मजबूती मिलेगी तथा हमारा लक्ष्य है कि वर्ष 2027 तक सभी बच्चों में बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक दक्षता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि प्रत्येक ब्लॉक की प्रस्तुति केवल उपलब्धियों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक-दूसरे से सीखने का महत्वपूर्ण अवसर है। इस सीख को अपने-अपने ब्लॉक में लागू करना हम सभी की जिम्मेदारी है। नवीन पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से बच्चों में हमारी संस्कृति, धरोहर, इतिहास और पर्यावरण के प्रति समझ विकसित करना तथा उसे व्यवहारिक रूप से जोड़कर सिखाना आवश्यक है। उन्होंने सभी को प्रेरित करते हुए कहा कि हमें अपने विद्यालयों और संकुलों को मॉडल के रूप में विकसित करने की दिशा में सामूहिक रूप से विचार और प्रयास करना चाहिए, ताकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लक्ष्य प्रभावी रूप से प्राप्त किया जा सके।अकलतरा बीआरसीसी शैलेंद्र सिंह बैस एवं सीएसी जयंत सिंह क्षत्रिय ने ‘बाल संसद: बच्चों की आवाज़ और लोकतंत्र की पहचान’ विषय अपनी प्रस्तुति के माध्यम से बताया कि कैसे बच्चों के उत्तरदायित्व, नेतृत्व क्षमता, लोकतंत्र, एवं राष्ट्र के प्रति ज़िम्मेदारी का बोध होता है। प्रत्येक स्कूल में यदि बाल संसद का गठन और उसका क्रियान्वयन हो तो बच्चे इन गुणों को बहुत ही सहजता के साथ हासिल कर लेंगे।बलौदा ब्लॉक से सीएसी राममनोहर सोनी ने ‘मुस्कान पुस्तकालय एवं प्रिंट रिच वातावरण’ के संदर्भ में अपने ब्लॉक के कार्यों को प्रस्तुत किया और बताया कि कक्षा कक्ष में प्रिंटरिच बहुत जरूरी है। इसके माध्यम से बच्चों के सीखने की प्रक्रिया बेहतर होती है। इसके साथ ही मुस्कान पुस्तकालय में बच्चों के स्तरानुसार एवं रोचक पुस्तकों के माध्यम से पढ़ने-लिखने का अवसर मिलेगा। बच्चे विभिन्न प्रकार के पुस्तकों को पढ़ते हुए जीवन जगत एवं अपने आस-पास के दुनिया को बहुत ही रोचक ढंग से जानने की ओर अग्रसर होते हैं।नवागढ़ ब्लॉक के सीएसी महेश्वर गोस्वामी एवं भूपेन्द्र जांगड़े ने ‘विज्ञान मेला’ के माध्यम से अपने ब्लॉक के शैक्षणिक प्रयासों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष ब्लॉक के सभी 42 संकुलों में विज्ञान मेले का सफल आयोजन किया गया, जिससे बच्चों को सीखने का एक जीवंत और अनुभवात्मक मंच मिला। उन्होंने स्पष्ट किया कि विज्ञान केवल पुस्तकों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि इसकी मूल प्रकृति प्रयोग, खोज और जिज्ञासा पर आधारित होती है। बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए यह आवश्यक है कि वे सवाल पूछें, अपने तर्क प्रस्तुत करें, सूक्ष्म निरीक्षण करें तथा वैज्ञानिक प्रक्रियाओं को अपने व्यवहार में शामिल करें। विज्ञान मेले के दौरान बच्चों ने 10 से 12 विभिन्न प्रयोगों का प्रदर्शन किया, जो न केवल उनके कौशल और समझ को दर्शाते हैं, बल्कि आम जनमानस को भी विज्ञान से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास है। इस आयोजन में नवाचारी गतिविधियों को विशेष रूप से शामिल किया गया, जिससे बच्चों की रचनात्मकता और आत्मविश्वास दोनों का विकास हुआ। इस प्रकार, नवागढ़ ब्लॉक का विज्ञान मेला बच्चों में वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करने और शिक्षा को व्यवहारिक एवं रोचक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।बम्हनीडीह ब्लॉक द्वारा ‘एफएलएन एवं मापन मेला’ की प्रस्तुति प्रभावशाली और व्यवहारिक शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आई। सीएसी शरद चतुर्वेदी ने अपनी प्रस्तुति में विशेष रूप से मापन को केंद्र में रखते हुए बताया कि यह केवल गणित का एक भाग नहीं, बल्कि दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है चाहे वह लंबाई नापना हो, वजन तौलना हो या समय का आकलन करना। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों को मापन की अवधारणाएँ केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखकर, गतिविधि-आधारित तरीकों से सिखाना अधिक प्रभावी होता है। इसके लिए स्थानीय और सहज उपलब्ध सामग्रियों का उपयोग करते हुए बच्चों को वास्तविक अनुभव प्रदान किया जा सकता है, जिससे उनकी समझ गहरी और स्थायी बनती है। मापन मेले के माध्यम से बच्चों को विभिन्न गतिविधियों और प्रयोगों में सहभागी बनाया गया, जहाँ उन्होंने स्वयं मापन से जुड़ी प्रक्रियाओं को समझा और उनका अभ्यास किया। इस प्रकार, यह पहल न केवल एफएलएन लक्ष्यों को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध हुई, बल्कि बच्चों में गणितीय सोच और जीवनोपयोगी कौशल विकसित करने की दिशा में भी एक सार्थक प्रयास रही।पामगढ़ से सीएसी निधि लता जायसवाल ने ‘संकुल बैठक की भूमिका’ पर अपनी प्रस्तुति देते हुए इसे शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार का एक प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक सप्ताह नियमित रूप से अकादमिक संकुल बैठक आयोजित की जाए, तो यह शिक्षकों के लिए सीखने, समझने और अपने अनुभव साझा करने का सशक्त मंच बन जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन बैठकों में शिक्षक अपने कक्षा कक्ष के अनुभव, चुनौतियाँ और नवाचार साझा करते हैं, जिससे उन्हें एक-दूसरे से सीखने का अवसर मिलता है। साथ ही, विषयवार चर्चा, गतिविधि-आधारित शिक्षण, टीएलएम के उपयोग और बच्चों की सीखने की प्रगति पर सामूहिक रूप से विचार-विमर्श किया जाता है। इससे शिक्षकों को अपनी शिक्षण पद्धति में सुधार करने के ठोस सुझाव मिलते हैं।निधि लता जायसवाल ने यह भी बताया कि संकुल बैठकों के दौरान तय की गई गतिविधियों और रणनीतियों को शिक्षक अपनी कक्षा में लागू करते हैं, जिससे शिक्षण प्रक्रिया अधिक रोचक, सहभागितापूर्ण और प्रभावी बनती है। इसका सीधा लाभ बच्चों को मिलता है, क्योंकि वे गतिविधियों के माध्यम से बेहतर ढंग से सीख पाते हैं और उनकी समझ अधिक स्पष्ट होती है। इस प्रकार, नियमित अकादमिक संकुल बैठक न केवल शिक्षकों की क्षमता निर्माण में सहायक है, बल्कि यह बच्चों के सीखने-सिखाने की प्रक्रिया को भी सुदृढ़ बनाती है और शिक्षा की गुणवत्ता में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।कॉन्क्लेव में प्रस्तुत नवाचारों में गतिविधि आधारित शिक्षण, खेल-खेल में सीखना, मेले के माध्यम से सीखे गए अनुभवों को साझा करना एवं उसे उत्सव का रूप देना, स्थानीय संसाधनों का उपयोग, और बच्चों में भाषा एवं गणितीय दक्षता विकसित करने के अनूठे तरीके प्रमुख रहे। शिक्षकों ने यह भी बताया कि कैसे उनके प्रयासों से बच्चों की उपस्थिति, सीखने की रुचि और अभिभावकों की सहभागिता में सकारात्मक बदलाव आया है।2025-26  के उत्कृष्ट कार्यों की प्रस्तुति के बाद सभी के साथ शैक्षणिक वर्ष 2026 -27 के लिए योजना निर्माण के संदर्भ में भी चर्चा की गई और एफ़एलएन हासिल करने के लिए विशेष रूप से योजना बनाने और उसका क्रियान्वयन करने पर ज़ोर दिया गया। कार्यक्रम का संचालन नमिता गोपाल एवं योगेश्वरी तंबोली ने किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से बीआरसीसी बम्हनीडीह हिरेन्द्र बेहार, बीआरसीसी अकलतरा शैलेंद्र सिंह बैस, बीआरसीसी बलौदा, बीईओ नवागढ़ अशोक पाटले आदि उपस्थित रहे।एपीसी गोपेश्वर साहू ने अपने वक्तव्य में 2026 -27 के लिए योजना निर्माण पर ज़ोर देते हुए कहा कि हम बहुत बड़े-बड़े कार्य योजना नहीं बनाएँ, बल्कि ऐसी योजना बनाएँ जिसे हम हासिल करने के लिए सहजता आगे से बढ़ सकें। योजना निर्माण में बच्चों एवं पालकों को भी शामिल करें।कॉन्क्लेव के अंत में यह संदेश दिया कि यदि शिक्षक नवाचार और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें, तो शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार संभव है। यह आयोजन न केवल शिक्षकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ।कार्यक्रम के अंत में एपीसी हेमलता शर्मा ने सभी प्रस्तुतकर्ताओं को धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा कि हम सभी क्षमतावान हैं, बस जरूरत है उसे धरातल पर लागू करने का, यदि हम अपना निरंतर प्रयास जारी रखेंगे तो सफलता हासिल करने में कोई मुश्किल नहीं होगा।

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button